वैसे तो इस दुनिया में कोई भी बुरा नहीं है।
जिंदगी में सबसे पहले स्वस्थ होना जरूरी है चाहे शारीरिक या मानसिक।
फर्क पड़ता है बस
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जैसी संगत वैसी रंगत
मेरे से पहले लोग मेरे दोस्तों को जानेंगे फिर मुझे। कभी भी अपने प्रोफेशन से कोई दगा नहीं अपने आप से कोई छल कपट नहीं है। अपने काम को करने में अपने आप का ही टेस्ट लिया करो दूसरा क्या लेगा? आत्मसंतुष्टि बहुत जरूरी है।
आप क्या सोचते हो प्लीज। 🤔🥀🙏
ब्लॉग का साइज बढ़ाओ सर।वाक्य बढ़ाओ
ReplyDeleteजी जरूर मैं कोशिश करूंगा और आगे से पोस्ट थोड़ा लंबी खींच लूंगा
DeleteThanks for your compliments sir
बेहतरीन
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DeleteGreat thoughts mama ji ❤️
ReplyDeleteThanks bhanje
Deleteलोग दुनिया को जानने की बात तो करते हैं, पर स्वयं को नहीं जानते. जानते ही नहीं, बल्कि जानना ही नहीं चाहते. खुद को जानना ही दुनिया की सबसे बड़ी नियामत है. जो खुद को नहीं जानता, वह भला दूसरों को कैसे जानेगा? दूसरों को भी जानने के लिए पहले खुद को जानना आवश्यक है. इसलिए बड़े महानुभाव गलत नहीं कह गए हैं कि जानने की शुरुआत खुद से करो.
ReplyDeleteएक महात्मा का द्वार किसी ने खटखटाया. महात्मा ने पूछा-कौन? उत्तर देने वाले ने अपना नाम बताया. महात्मा ने फिर पूछा कि क्यों आए हो? उत्तर मिला- खुद को जानने आया हूँ. महात्मा ने कहा-तुम ज्ञानी हो, तुम्हें ज्ञान की आवश्यकता नहीं. ऐसा कई लोगों के साथ हुआ. लोगों के मन में महात्मा के प्रति नाराजगी छाने लगी. एक बार एक व्यक्ति ने महात्मा का द्वार खटखटाया- महात्मा ने पूछा-कौन? उत्तर मिला-यही तो जानने आया हूँ कि मैं कौन हूँ. महात्मा ने कहा-चले आओ, तुम ही वह अज्ञानी हो, जिसे ज्ञान की आवश्यकता है? बाकी तो सब ज्ञानी थे.
Self assessment par aur bhi umda post hai meri sir.
DeleteBahut khub
ReplyDelete🌷🙌
DeleteGajab
ReplyDeleteआपने तो सीधे साउथ अफ्रीका से पकड़ लिया मुझे थैंक्स विपिन भाई आपने मुझे समझा।
Delete👍👍
ReplyDeleteमैने सुना है लोग अक्सर बदल जाते है कुछ यूं ही,
ReplyDeleteपर उसका क्या जो बदलने पर भी न बदला हो।।
ख्वाहिशें रखता है दबाये वो अक्सर सीने मे अपने,
जबकि उसकी अपनी कोई ख्वाहिश थी ही नहीं।।
लडता रहता वो जमाने से तन्हा कुछ यूं ही आज भी,
करता है जिद्द परायों से कि रह न जाय कोई ख्वाहिश मेरी अधूरी।।
समझेगा क्या कोई कि इरादों में है अभी जान बाकी उसकी,
तू यूं न ख्वाहिशें दबा अपनी मेरे यार तेरी राह का मैं अभी साथी हूँ।।
।।आपके सर्मपण के लिए।।
Thanks my friend
Deleteशुरुआत अच्छी है। आपके सुविचारों से हमें भी कुछ नया सीखने को मिलेगा।🙏
ReplyDelete🌷👌👍
DeleteWah ..wah...
ReplyDeleteThanks Mam
DeleteWah ..wah...
ReplyDelete🥰🙏
DeleteWah ..wah...
ReplyDelete👌👍
DeleteVery nice bhaiya...keep it up
ReplyDeleteथैंक्स डॉ अचला मेम।
Deleteबहुत सुंदर दोस्त। सराहनीय प्रयास है। जारी रखिये।
ReplyDeleteThanks मित्र
Deleteसगंत का असर आत्मसयंम पर निर्भर करता है। उदाहरण- हीरा, कोयले के बीच रहकर भी चमक नहीं खोता। मनुष्य का स्वभाव है कि उसे बदलाना होगा तो अकारण ही बदल जायेगा एवं नहीं बदलना हो तो विपरीत परिस्थितियों मे भी नहीं बदलेगा। अर्थात मान लो तो हार, ठान लो तो जीत। (जीत not relate to you it means win).
ReplyDeleteआप की संगत भी ठीक लग रही है मुझे स्पेशली जीत 👀my father good name is Jeet Singh and absolutely related to me for your kind information.
DeleteWhat's special hormones inside your brain this is the perfect example you shown.
Thanks👍
वो हमारे लिए हमेशा पूज्यनीय हैं। he is not part of win or loos. He is god for us.
DeleteThanks bro👍
Delete🙏🙏🙏🙏 nice
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