Monday, July 27, 2020

जरा सी बल फेसबुकिया ज्ञान 👌

पोस्ट थोड़ा बड़ी है आराम से पढ़ लेना प्लीज आपको हंसी भी आएगी और घनघोर गुस्सा भी आएगा पर प्लीज एक बार पढ़ लेना।

[Actually this post 50% based on Mera Pahad (Uttarakhand) and 50% knowledge for all. My humble request to all English readers specially south India (DRRP, DRM, DPS, DASP, DKS, DSJ please crack code.🥰 🥰👏🏼 if you read my all post in Google Chrome or other browsers  so please you can change Language setting option right side corner of the page and you can copy link and paste in browser and bookmarked it for daily reading or you can screenshot the link please.
Thank you.👏🏼]
बल फेसबुक पर हम सब क्या परोस रहे हैं? उन्हीं बिंदुओ पर बात करूंगा।
वैसे तो बहुत सारे लोग हैं जो पहाड़ की संस्कृति के लिए अच्छा काम कर रहे हैं। हमारी धरोहर और संस्कृति को आगे ले जाने में अहम भूमिका निभाने में निरंतर प्रयासरत हैं। और भी बहुत सारे लोग है उन सभी का दिल की गहराइयों से स्वागत। परंतु सच बताऊं तो मैं जानता नहीं हूं, ज्यादा लोगों को। एफबी पर मैं जिन आदरणीय हस्तियों को को जानता हूं:-

भीष्म कुकरेती: 

सर जी को मैं लगभग 2010 या थोड़ा आगे पीछे हो सकता है जानता हूं ओन्ली फेसबुक के हिसाब से इससे ज्यादा नहीं। और न कभी मैं इनसे मिला हूं। यह हमारे सर जी निरंतर पहाड़ के लिए काम कर रहे हैं और शायद उम्र 68 के होंगे इस समय में है और जसपुर पौड़ी गढ़वाल से हैं।यह जानकारी भी में उनके प्रोफाइल इंफो के हिसाब से बता रहा हूं। जबरदस्त पोस्ट डालतेl रहते है अपने पहाड़ की। इन्होंने कई बुक्स भी लिखी हैं पहाड़ी भाषा में।
जहां लोगों को किसी से मतलब नहीं है, वहां आदरणीय सर जी मेट्रो सिटी में बैठ कर भी सिर्फ़ अपने पहाड़ के लिए सोचते हैं ग्रेट सर जी। इनकी कई बातें हैं ओनली पहाड़ी में या यूं कहूं निराट पहाड़ी। मेरी नजर में यह पहाड़ी विकिपीडिया है damn sure Botany से M.Sc. किया हुआ है। यह बात बिल्कुल साफ है कि में इन्हे एफबी के हिसाब से जानता हूं। लेकिन जब कभी मुझे इनकी कोई पोस्ट पढ़ने का मौका मिलता है तो पढ़ता हूं। इनकी रख्वाली, पहाड़ी गाली, घात, जेकार, उचानु, मसान पुज्ये, चौक, उर्खाला, सागवाड़ा, तिवारी, डिंदला, ओबरा मजुला निमदरी शाली, पंदेरा, कोरा, पुंगदा अर पता नी क्या क्या। सर जी ने कुछ नहीं छोड़ा और सच कहूं तो कुछ कुछ मेरे भी सर के उपर (OHD) से हो जाता है सच्ची में ये कुमाऊ क्षेत्र के है मे बी। पर यह भी बता दूं आपको कि प्रत्येक पोस्ट नहीं पढता हूं सच बोलता हूं मैं तो। मैं आपसे शायद म्यार पहाड़ ग्रुप से जुड़ा हूं। यहां पर थोड़ा ट्विस्ट है।

अनुभव उपाध्याय मेरे एक्स बॉस

इस ग्रुप के जो मॉडरेटर या को - मॉडरेटर  हैं, वह मिस्टर अनुभव उपाध्याय जी, जो सल्ट कुमाऊ क्षेत्र के है। और मजेदार बात कि दिल्ली में मेरे एक्स बॉस रह चुके हैं। यह भी बिंदास बंदे हैं, इनके साथ तो बहुत अच्छा टाइम स्पेंड किया फुल्टूस मस्त बंदे। ये ठहरे घुमकड़ पूरे पहाड़ और इंडिया घूमे होंगे विथ फैमिली। इस समय नोएडा में अच्छी पोस्ट पर सर्विस कर रहे हैं दिल से पहाड़ी। एक्स बॉस तो आज भी मेरे व्हाट्सएप पर हैं 🤣 और लगभग डेली बात होती है। और कुछ पूछना हो तो इनको बहुत परेशान करता रहता हूं मैं एक्सपर्ट ऑपिनियन के लिए बात बात पर। पर दाज्यू जब आप ब्लॉग को पढ़ रहे होंगे तो मुझे जरूर याद करेंगे🤔। आपकी वह बात हमेशा याद रहती है मुझे कि किसी भी इंसान की रेस्पेक्ट दिल से होती है दिखावे के लिए नहीं। थैंक्स एक्स बॉस एंड दाज्यू।☺️

डॉ राकेश भट्ट उर्फ़ भेजी

दुनिया के लिए आप डॉक्टर राकेश भट्ट है और मेरे और मेरे दोस्तों के लिए आप बल सिर्फ डॉ राकेश भट्ट उर्फ़ भेजी उर्फ़ पहाड़ी गूगल। संपूर्ण ज्ञान कू भंडार धन्य हैं आप। 1997 से आज दिन तक जब भी मुझे टाइम मिलता है तब तब सुनता हूं आपको। अब यह भी नहीं कहूंगा कि हर पोस्ट पढ़ता हूं और तुरंत कॉमेंट्स करता हूं सीधी बात जब मुझे टाइम मिलता है तब देख लेता हूं। आप लोगों पर लिखने का मन इसलिए किया कि आपने कल रात यह बोलकर मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया कि मैं छोटा मोटा कलाकार हूं भेजी आप पहाड़ी गूगल हो और ढोल सागर के स्पेशलिस्ट हो। आपने ये बात बोली और मुझे भी थोड़ा गुस्सा आ गया और लिख दिया आप पर ही।
सबसे बड़ी बात आप हमारे भेजी हैं। भेजी बोलने वाले में कौन-कौन होता है? वैसे आपके साथ तो रिश्ता हमारा कुछ और भी है श्रीनगर डाक बंगले वाला। मेरे सारे दोस्तों को आप जानते हैं मेरे दोस्तों मैं स्वयं राजेन्द्र सिंह पंवार और मेरा पार्टनर संतोष राणा, पड़ोसी दीपक सेमवाल, अंशुमान प्रजापति भंडारी निवास, मदन चमोला विवेक डिमरी और हमारे पंडित जी  प्रकाश भट्ट और भी होंगे अभी याद नहीं आ रहे। में तो आपके तीनो भाइयों के नाम भी जानता हूं कैलाश भाई, संजय भाई हमारे क्लासमेट और छोटा भुल्ला नंदू इसके अलावा मामू, बॉबी भाई, सुमीत भाई, राजेश भाई सब को जानता हूं। आपके साथ दिल के रिश्ते भी है और फेसबुक का रिश्ता भी है सच बताऊं यह जरूरी नहीं है कि मैं आपकी हर पोस्ट पर लाइक और कमेंट करू जब मुझे टाइम मिलेगा मैं करूंगा। आप मझे हुए कलाकार है यह सारा पहाड़ जानता है और मैं आपसे विनती करना चाहता हूं कि आप एक संवाद (Webinar) करें और फेसबुक के महत्व को बताएं हमारे पहाड़ के लिए क्योंकि आप तो महान महान महान अर निशब्द छो भेजी। आप जैसे लोग ही इस फेसबुक का खंडन कर सकते हैं। सबको समझा सकते है अपने Webinar में कि हम एफबी या सोशल मीडिया पर समाज को क्या परोसें?

मेरे जैसे गांव के आदमी के 2-3 प्रश्न है फेसबुक से इनको भी एक्सर्पट्स से आप रख लेना:
1. फेसबुक पर जब हम कोई पोस्ट करते हैं तो हम अपनी फीलिंग्स बताते हैं जैसे कोई बोलता है कि आई एम लाफिंग विथ अलाणा कोई बोलता आई एम थिंकिंग अबाउट फलाना वहां पर अगर कस्टम का बटन हो तो हम अपनी फीलिंग्स पहाड़ी में बता सकते हैं ना।
फॉर एग्जांपल "में नचनू तिमला पत्तों मा जन मधु पंवार मेरी वाइफ दगदी, मि आज भोट थकुं छो अमित पंवार दगड़ी (हमारे वार्ड मेंबर जिन्हें गांव में इनके अच्छे कामो के लिए सर जी बोलता हूं), मी सोच्नू छो 🤔 के दगदी उगेरा वगेरा।"
It should customised button feeling/activity manually?

कोई कर सकता है तो बता दो प्लीज में तो कर नहीं पाया।आभारी रहूंगा।

2 वैसे इसमें भी तीन बटन होने चाहिए लाइक, डिसलाइक और कमेंट का। क्योंकि यूट्यूब सोशल साइट पर हम सब को तीन बटन दिखते है जैसे उधर किसी संत वाणी, किसी भी गाने और भगवान के वीडियो के नीचे भी 3 बटन होते है तो उसमें लाइक, डिसलाइक और कमेंट भी आते हैं। बल भगवान जी भी 👍👎
ऐसी व्यवस्था नंबर वन साइट एफबी पर होनी चाहिए।
3. वैसे तो एफबी पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का यूज होता है यह मैं पक्का जानता हूं।
क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वजह से वो हमारी फीलिंग पकड़ लेता है कि हमें कौन सी पोस्ट पसंद है। उसी से रिलेटेड पोस्ट हमारे आस पास घूमती है। थोड़ा डिप्ली बात की जाए एक्सपर्ट्स से प्लीज़। अर परिभाषा मा बथोंदा कि कंप्यूटर कू क्वी दिमाग नी होंडू ऊ हमारा इंस्ट्रक्शन पर चल्डू।🤔
लेकिन इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बहुत बड़ा योगदान है। अच्छा यू क्या वे?
4. कुछ लोग दिन भर किसी मंत्री, मंदिर, rubbish सीजनल चुटकुलों पर या आजकल के Hot cake Covid-19 के नेशनल और इंटनेशनल एक्सपर्ट बने रहते हैं। और कुछ तो एक कदम आगे अमेरिका रूस कू बजट बनोना एक्सपर्ट भी छीन। पर सिर्फ आफू ते नी देखना।
5 देश के सभी गांवों के प्रथम प्रथम नागरिक आई मींस प्रधानों या लोकल जनप्रतिनिधि की तो खैर नहीं आजकल। ये नहीं हुआ वो नहीं हुआ मेरा सवाल भाई तुमने कुछ किया अपना स्व आंकलन करना चाहिए।
जब हमने भगवान तक को मास्क पहना दिया तो सोचो बल हम तो वह इंसान है। खाली पीली शेयरिंग करते रहते हैं अपना कुछ नहीं लिखते है बल हाथ घिसते है वहीं के बने बनाए gif और स्माइली डाल देते है ये परोस रहे हम सोशल मीडिया पर। 24 घंटे में से आधा टाइम तो इसी  तरह स्पेंड करते है लेकिन आज तक समझ नहीं पाए फेसबुक किस लिए बना है मैं तो इसे फेसबुक नहीं फेस बुक्ड बोलता हूं सब फिक्स्ड है। क्योंकि मैंने देखा है जब भी कोई पोस्ट डालता हूं  उसमें सिर्फ अपने आगे आते है जैसे मेरी बहने मेरे रिश्तेदार, मेरे मौसी जी मेरे खास दोस्त। वरना हमारी लंबी चौड़ी पोस्ट ऐसे पड़ी रहती है कई दिनों तक बल हमारी घनघोर बेज्जती🤣।
कहीं हम श्रृंक परिवारवाद अर्थात सिकुड़ना या यूं कहें नेपोटिज्म का शिकार तो नहीं हो रहे सोचनीय🤔
इस फेस बुक्ड को भी पता नी चला कि हम ता छीन ठेठ पहाड़ी खाली स्पेशल मौकों पर डीपी लगाने से कुछ नहीं होता है अंदर से फीलिंग भी आनी चाहिए चाहे तुम दुनिया के किसी भी छोर पर बैठे हो। सोचता हूं शायद मैं ही गलत हूं लेकिन करूं क्या डॉ राकेश भट्ट उर्फ़ भेजी मैं तो ऐसा ही हूं और चाहता हूं हमारी फिलिंग्स क्या बोलती है हमें वह करना चाहिए बस हम समाज को क्या परोस रहे हैं क्या सीख रहे हैं इस बात की चर्चा होनी चाहिए और हान मेंने अंडर फ्रीडम ऑफ स्पीच रूल के हिसाब से बोला। कृपया ये मेंने सेल्फ अनालिसिस किया और लिख दिया अन्यथा ना ले ये मेरी पर्शनल राय है।👏🏼
और आप से बेहतरीन कोई नहीं बता सकता है इस पर मैं चाहता हूं कि आप इन मुद्दों को मेरी तरफ से भी रखें इतना कर दोगे तो कुछ नया सीखने को मिलेगा।
इस पर आप एक जबरदस्त वेबीनार करो, जहां पर पहाड़ी गूगल और पहाड़ी विकिपीडिया का फ्यूजन होगा मा कसम मजा ए जोलु। भीष्म कुकरेती सर जी में सिर्फ आपको एफबी से जानता हूं और दिल से सिमन्या🥰👏💐 आप गर्मजोशी से स्वीकार कर्यां वान।
मैंने इतना ही सीखा इस फेसबुक से छोटे-छोटे प्रश्न बहुत सारे हैं। भेजी पता है मैं तो गंवार हूं गांव का आदमी हूं मैं ज्यादा जानता नहीं हूं बस अपना आंकलन आप जैसे लोगों से पॉजिटिव रहने की कला सीखी है। घनघोर दुखी वे ते किले रोन एक नई छीविं सिखाला। हमें अपने आप पर टाइम स्पेंट करना चाहिए अच्छी बातों से अपना श्रीजन। आप लोगों के नीचे रह कर बहुत कुछ सीखा है हमने में तो हर एक बंदे से सीखता हूं। लव यू ऑल। आपकी कृपा हो रही है हम पर, आपको पता ही नहीं है। 🥀👏🏼😊
भूल चूक के लिए क्षमा प्रार्थी!
राजेंद्र सिंह पवार

Saturday, July 25, 2020

सामंजस्य और उम्मीद एक अच्छी पहल!

सामंजस्य और उम्मीद एक अच्छी पहल! (Co-ordinatin and expectations a great start)!

आज तुलसीदास का एक श्लोक है वो बहुत याद आ रहा है:-

जहां सुमति तहां संपत्ति नाना।
जहां कुमति तहं बिपति निदाना।।

यह बात हम सभी पर लागू होती है क्योंकि हम समाज का हिस्सा है और समाज हमसे हैं। यदि हम सब एक दूसरे को मिलजुल कर साथ चलने और आगे बढ़ने की सोच रखते है, तो  वहां विकास के द्वार अपने आप खुल जाते हैं, में नहीं विकास दुबे की बात कर रहा हूं, और नहीं माननीय मोदी जी वाले विकास की बात कर रहा हूं। में स्वयं की बुद्धि के विकास की बात कर रहा हूं। जहां कुमति होती है वहां सड़न, गलन, जलन सब दिख रहा होता है। टकराव होता है असहयोग होता है और सामंजस्य का अभाव होता है स्वार्थ होता है वह विनाश का रास्ता होता है परस्पर सहयोग बंद मुट्ठी की तरह है जिसमें ताकत होती है।✊
लेकिन इस पर लेन-देन का रूल लगता है बड़ा कठोर नियम है
अगर मैं चाहता हूं कि मैं सबके साथ अच्छा व्यवहार रखू तो vice versa... क्योंकि गिव एंड टेक का जमाना है, बड़ा कठोर नियम है यह इसको इसकी तह में जाकर समझना पड़ेगा हम सबको। में भी इस रूल से ग्रसित हूं।
मेरी लड़ाई अपने आप से है मैंने अपने जिंदगी के बहुत कठोर नियम बनाए शायद कई लोगों को पसंद ना आए जिनको आए उनका भी स्वागत जिनको ना आए उनका भी स्वागत। मैं क्या कर सकता हूं बदलने की बहुत कोशिश करता हूं लेकिन बदल ही नहीं पाता हूं। मेरी लड़ाई तो अपने आप से है किसी और से नहीं। अब कुछ आगे लिखते हैं।

सुमति आती कैसे हैं?

सुमति आती है अच्छे व्यवहार से, विवेक से, सत्संग सुनने से, आप जैसे अच्छे लोगों के साथ रहने से। मैं तो अपने आप को धन्यवाद देता हूं कि आप जैसे लोगों के साथ रहने से कोई भी प्रॉब्लम मेरे लिए चींटी के समान लगती है, ना ही किसी से गिलवा है, नहीं किसी से शिकवा है। मैं तो हाथी हूं मदमस्त चलता हूं अपनी राह पर।
मेरा नेचर ऐसा ही है बाहर कड़क अंदर नरम यह नेचर मुझे मेरे सुपर हीरो और मेरे पिताश्री से मिला है क्योंकि करना है तो अच्छा करो वरना घर में बैठो यही मूल मंत्र है। मेरा यहां रूल घर, बाहर, दोस्तों एवं ऑफिस सब जगह एक जैसा है शायद जिंदगी भर यही रहे। भले जीवन की परीक्षा में कोई अंक नहीं मिलते। कोई मुझे इज्जत दे ना दे मुझे फर्क नहीं पड़ता।

वहीं लाइन तू  चलाचल ...🐗।

निष्कर्ष

मैं तो अपनी नजर में पास हूं 😊।
आप क्या सोचते हैं 🤔 प्लीज...📝

Friday, July 24, 2020

कोरोना विषाणू पर मेरा कुछ हल्का फुल्का सेल्फ अनालिसिस

कोरोना विषाणू पर मेरा कुछ हल्का फुल्का सेल्फ अनालिसिस:-

एक बात तय है कोरोना अभी नहीं जाएगा क्योंकि इसके लिए सिर्फ हम जिम्मेदार हैं और कोई नहीं एक्सप्लेन करता हूं।
कोरोना जब एक विश्वव्यापी महामारी है तो जाहिर सी बात है कि भारत भी इससे अछूता नहीं रह सकता था और हुआ भी यूं ही। इसलिए कोरोना भारत में आया यह एक constant है लेकिन कोरोना भारत से जल्दी चला जाए या ना जाए यह एक वेरिएबल है समझाता हूं अच्छे से।
जो कोरोना पूरे विश्व में आ रखा है वह भारत के कोने कोने में भी फैला। पर उसको फैलाया किसने? 🤔 उत्तर मिलता है कि हमने।

इसको कैसे कम कर सकते थे?

इसके बारे में हम सब एक दूसरे को बोलते रहे स्टे होम स्टे सेफ उगैरा-वगैरा। लेकिन क्या हमारे पैर घर में रुके अगर उत्तर मिलता है नहीं तो समझ लो आगे कितना रहेगा यह भी इसी से निकल जाएगा। हम कांस्टेंट को नहीं बदल सकते, I mean Corona. लेकिन वेरिएबल को आसानी से बदला जा सकता था जैसे मास्क पहनना, सैनिटाइजर का कम उपयोग लेकिन हैंड वॉश ज्यादा, घर में बैठना, हाइजेनिक खाना खाना, मेडिटेशन करना, कुछ नया स्किल डेवलपमेंट, spritiual development इत्यादि बहुत सी चीजें थी। पर इनमें क्या रखा बल खुटी भ्विं नी छीन केंगी भी 👀

हम तो day-1 से देख रहे हैं की लोगों ने तालियां और थालिया बहुत बजाई और बाद में गालियां भी बजाई। लोगों की मेंटालिटी को हमने खुद झेला है, परंतु हम चुपचाप अल्टरनेट डे पर अपना काम करते रहे और आगे भी करते रहेंगे वो भी चुपचाप।
और जिस दिन छुट्टी होती है उस दिन सिर्फ अपने घर में। मेरा पर्सनल एक्सपीरियंस है 120+ का। कि में सारे नियम को फॉलो करता हूं और करता रहूंगा और समझाता रहूंगा कि भैया अपने घर में रहो अच्छा करो, कुछ दान भी करो needy लोगों को उपर वाला डबलिंग में वापस कर देगा।
यह सब सवाल हम अपने आप से पूछें और सोशल मीडिया पर सिर्फ गो कोरना गो! कोरोना भाग! न करते रहै। यह बहुत जिद्दी है पक्का जाएगा नहीं जब तक हमने चाहा नहीं। अपने घरों में रहे फालतू किसी को ना दिखाएं कि हम कौन है? यह ऐसी बीमारी है कि छोटा बड़ा कुछ नहीं देखेगी सीधा लपेट लेगी।

निष्कर्ष:-

तू जिंदा है तू जिंदगी की जीत पर यकीन कर।
अगर हे कहीं स्वर्ग तो उतार का जमीन पर।

खो जाओ कुछ नया सीखने में बस एक कदम डेली।
आप मस्त रहो व्यस्त रहो प्रभु जी सब ठीक कर देंगे।

धन्यवाद एवम् क्षमा प्रार्थी

Wednesday, July 22, 2020

जिंदगी जिंदादिल

वैसे तो इस दुनिया में कोई भी बुरा नहीं है।
जिंदगी में सबसे पहले स्वस्थ  होना जरूरी है चाहे शारीरिक या मानसिक।
फर्क पड़ता है बस
👇👇👇

जैसी संगत वैसी रंगत

मेरे से पहले लोग मेरे दोस्तों को जानेंगे फिर मुझे। कभी भी अपने प्रोफेशन से कोई दगा नहीं अपने आप से कोई छल कपट नहीं है। अपने काम को करने में अपने आप का ही टेस्ट लिया करो दूसरा क्या लेगा? आत्मसंतुष्टि बहुत जरूरी है।

आप क्या सोचते हो प्लीज। 🤔🥀🙏

Computer tips हल्की फुल्की

If you have any kind of query regarding computer software specially MS- office suite. Please either come to my धोरे or direct call me. I am damn sure solve within half an hour or sooner. My गुरूजी told me that you can share your knowledge in this way also, that's why I am telling you please लपेट लो।

Rajendra Singh Panwar

शिक्षक दिवस पर दो शब्द

आज टीचर्स डे है और ना चाहते हुए ब्लॉग लिखने पर मजबूर हुआ हूं। अगर नहीं लिखता हूं तो मेरी जिंदगी में आए सभी गुरुओं का घोर अपमान होगा जो कि मु...