Wednesday, July 22, 2020

जिंदगी जिंदादिल

वैसे तो इस दुनिया में कोई भी बुरा नहीं है।
जिंदगी में सबसे पहले स्वस्थ  होना जरूरी है चाहे शारीरिक या मानसिक।
फर्क पड़ता है बस
👇👇👇

जैसी संगत वैसी रंगत

मेरे से पहले लोग मेरे दोस्तों को जानेंगे फिर मुझे। कभी भी अपने प्रोफेशन से कोई दगा नहीं अपने आप से कोई छल कपट नहीं है। अपने काम को करने में अपने आप का ही टेस्ट लिया करो दूसरा क्या लेगा? आत्मसंतुष्टि बहुत जरूरी है।

आप क्या सोचते हो प्लीज। 🤔🥀🙏

32 comments:

  1. ब्लॉग का साइज बढ़ाओ सर।वाक्य बढ़ाओ

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    1. जी जरूर मैं कोशिश करूंगा और आगे से पोस्ट थोड़ा लंबी खींच लूंगा
      Thanks for your compliments sir

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  2. Great thoughts mama ji ❤️

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  3. लोग दुनिया को जानने की बात तो करते हैं, पर स्वयं को नहीं जानते. जानते ही नहीं, बल्कि जानना ही नहीं चाहते. खुद को जानना ही दुनिया की सबसे बड़ी नियामत है. जो खुद को नहीं जानता, वह भला दूसरों को कैसे जानेगा? दूसरों को भी जानने के लिए पहले खुद को जानना आवश्यक है. इसलिए बड़े महानुभाव गलत नहीं कह गए हैं कि जानने की शुरुआत खुद से करो.

    एक महात्मा का द्वार किसी ने खटखटाया. महात्मा ने पूछा-कौन? उत्तर देने वाले ने अपना नाम बताया. महात्मा ने फिर पूछा कि क्यों आए हो? उत्तर मिला- खुद को जानने आया हूँ. महात्मा ने कहा-तुम ज्ञानी हो, तुम्हें ज्ञान की आवश्यकता नहीं. ऐसा कई लोगों के साथ हुआ. लोगों के मन में महात्मा के प्रति नाराजगी छाने लगी. एक बार एक व्यक्ति ने महात्मा का द्वार खटखटाया- महात्मा ने पूछा-कौन? उत्तर मिला-यही तो जानने आया हूँ कि मैं कौन हूँ. महात्मा ने कहा-चले आओ, तुम ही वह अज्ञानी हो, जिसे ज्ञान की आवश्यकता है? बाकी तो सब ज्ञानी थे.

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    1. आपने तो सीधे साउथ अफ्रीका से पकड़ लिया मुझे थैंक्स विपिन भाई आपने मुझे समझा।

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  5. मैने सुना है लोग अक्सर बदल जाते है कुछ यूं ही,
    पर उसका क्या जो बदलने पर भी न बदला हो।।
    ख्वाहिशें रखता है दबाये वो अक्सर सीने मे अपने,
    जबकि उसकी अपनी कोई ख्वाहिश थी ही नहीं।।

    लडता रहता वो जमाने से तन्हा कुछ यूं ही आज भी,
    करता है जिद्द परायों से कि रह न जाय कोई ख्वाहिश मेरी अधूरी।।
    समझेगा क्या कोई कि इरादों में है अभी जान बाकी उसकी,
    तू यूं न ख्वाहिशें दबा अपनी मेरे यार तेरी राह का मैं अभी साथी हूँ।।
    ।।आपके सर्मपण के लिए।।

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  6. शुरुआत अच्छी है। आपके सुविचारों से हमें भी कुछ नया सीखने को मिलेगा।🙏

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  7. बहुत सुंदर दोस्त। सराहनीय प्रयास है। जारी रखिये।

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  8. सगंत का असर आत्मसयंम पर निर्भर करता है। उदाहरण- हीरा, कोयले के बीच रहकर भी चमक नहीं खोता। मनुष्य का स्वभाव है कि उसे बदलाना होगा तो अकारण ही बदल जायेगा एवं नहीं बदलना हो तो विपरीत परिस्थितियों मे भी नहीं बदलेगा। अर्थात मान लो तो हार, ठान लो तो जीत। (जीत not relate to you it means win).

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    1. आप की संगत भी ठीक लग रही है मुझे स्पेशली जीत 👀my father good name is Jeet Singh and absolutely related to me for your kind information.
      What's special hormones inside your brain this is the perfect example you shown.
      Thanks👍

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    2. वो हमारे लिए हमेशा पूज्यनीय हैं। he is not part of win or loos. He is god for us.

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